01 जनवरी 1960 को ग्राम किम्बगड़, जिला अल्मोड़ा की पुण्यभूमि पर जन्मे श्री हरिदत्त बलोदी जी समाजसेवा, शिक्षा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में एक सम्मानित एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।
उनका सम्पूर्ण जीवन समाज उत्थान, जनसशक्तिकरण एवं मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा है।उन्होंने अपने कार्यजीवन की शुरुआत शिक्षा सेवा से की तथा लगभग पाँच वर्षों तक राजेश्वरी कृणा विद्यालय, बरंगल में अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। अपने शिक्षण कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनेक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
इसके पश्चात् वे जलागम विकास समिति, मसाण नदी प्रथम के अध्यक्ष बने, जहाँ उनके दूरदर्शी नेतृत्व, समर्पण एवं संगठन क्षमता ने समिति को नई दिशा एवं मजबूती प्रदान की। उन्होंने ग्रामीण विकास, जनसहयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में भी श्री बलोदी जी ने क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि के रूप में जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया तथा उनके समाधान हेतु निरंतर प्रयास किए। समाज की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने एवं उनके समाधान के लिए कार्य करने की उनकी क्षमता सदैव सराहनीय रही है।
वर्तमान में खल्डुआ-नागचूलाखाल ग्रामीण विकास समिति के अध्यक्ष के रूप में क्षेत्र के विकास, सामाजिक एकता एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में समिति सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकासात्मक गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्रहित में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।समिति एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित बड़े-बड़े कार्यक्रमों एवं आयोजनों के सफल संचालन की जिम्मेदारी भी वे कुशलतापूर्वक निभाते रहे हैं।
अपनी प्रभावशाली वाणी, नेतृत्व क्षमता एवं उत्कृष्ट जनसंपर्क कौशल के कारण श्री हरिदत्त बलोदी जी को क्षेत्र के एक प्रखर प्रवक्ता एवं कुशल मार्गदर्शक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।
आज भी वे अपने अनुभव, सेवाभाव एवं कार्यशैली से युवाओं एवं समाज को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं तथा समाजहित एवं क्षेत्रीय विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। 🙏